एक प्रेम भरा गीत ..……बस वो थी।

एक प्रेम भरा गीत ..……बस वो थी।

बिता बचपन मेरा सारा,मिलन की रात बस वो थी।
नज़ारे देखे कई सारे, बस मुलाखात एक वो थी।I
एक दिन ऐसा आया, में थोड़ा सा था घबराया।
में कान्हा बन गया उसका, राधिका जो मेरी थी।

दुआएँ दे रहे थे सब,दुआ के साथ बस वो थी।
गए थे साथ में हम सब,आये तो साथ में वो थी।।
हर तरफ मौज मस्ती हे,कही खुशिया कही गम हे
उसकीआँखों मेंआँसू थे,खुशी दिल में उसके थी।

जो मिले हम तुम दोनों ,गूंज उठी थी शहनाई।
अधूरे इस दिल के कोने की,कर दी तूने भरपाई।।
विवाह की वेदी पर लिए,जो सात फेरे हमने।
में तुम्हारा दिन बना और,तुम मेरी रात बन पाई।।

अधर से कोई अधर,कभी न दूर हो पाए।
मिला जो साथ इस जग में,साथ जन्मों तक जाए।
भरे झोली तुम्हारी वो, पथिक प्रेम पथ पर हो
बनकर के सुदामा जो, तुम्हारे द्वार पे आये।।

कमलेश शर्मा "कवि कमल"
मु. पोस्ट:-अरनोद, जिला:-प्रतापगढ़(राज.)
Mob. 9691921612

0 Response to "एक प्रेम भरा गीत ..……बस वो थी। "

Post a comment

Iklan Atas Artikel

Iklan Tengah Artikel 1

Iklan Tengah Artikel 2

Iklan Bawah Artikel